Benazir Bhutto became Prime Minister of Pakistan at the age of 35 – एक लड़की जो 35 साल की उम्र में बनी थी देश की प्रधानमंत्री, फिर कुछ ऐसे हुई थी हत्या

आज बात उस लड़की की जिसे राजनीति विरासत में मिली थी लेकिन जिंदगी में उतार चढ़ाव बड़े देखे थे। फिर बड़ी हुई तो जान का खतरा भी पैदा हुआ और पढ़ाई के लिए विदेश भेज दिया गया। जब वतन लौटी तो फिर देश की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी। हम बात कर रहे हैं बेनजीर भुट्टो की जो 35 साल की उम्र में पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थी।

21 जून 1953 में जुल्फिकार अली भुट्टो के घर बेटी का जन्म हुआ, नाम रखा गया बेनजीर भुट्टो। जुल्फिकार भुट्टो, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी रहे। बेनजीर की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई पकिस्तान में ही हुई थी। थोड़ा बड़ी हुई तो उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेज दिया गया। कहा यह भी गया कि बेनजीर को पकिस्तान में खतरा था इसलिए उन्हें विदेश भेजा गया था। पहले उन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड से डिग्री ली फिर वह ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चली गईं।

ब्रिटेन में पढ़ाई के दौरान बेनजीर भुट्टो से जुड़े कई किस्से और तस्वीरें भी सामने आई। इन सबने बाद में पाकिस्तान की सियासी गलियों में खूब सुर्खियां भी बटोरी। किस्सों के अलावा बेनजीर भुट्टो अपनी पार्टियों के लिए भी मशहूर थी। फिर पाकिस्तान आकर पिता की राजनीतिक विरासत संभाली। जिन्हें हत्या के आरोप में 4 अप्रैल 1979 को फांसी की सजा दे दी गई थी। बेनजीर के पिता जुल्फिकार अली भुट्टो को 1975 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया था।

बेनजीर भुट्टो साल 1988 में पहली बार चुनाव जीतकर पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनी। हालांकि बेनजीर केवल दो साल ही प्रधानमंत्री बनी रह पाई थी क्योंकि साल 1990 में पाक राष्ट्रपति द्वारा उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था। तीन साल बाद एक बार फिर उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। साल 1993 में बेनजीर फिर से पीएम बनी लेकिन 1996 में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। बेनजीर जेल गई और जेल से बाहर आईं तो अंत में उन्हें देश छोड़ना पड़ा।

साल 2007 में बेनजीर वापस पाकिस्तान लौट आईं। एक बार फिर से वह पाकिस्तान में चुनाव लड़ना चाह रही थी। चुनावों में प्रचार के दौरान उन्होंने अलकायदा समेत कई आतंकी संगठनों से लेकर विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान उन्हें कई बार जान का खतरा बताया गया। दिसंबर 2007 को एक चुनावी रैली के बाद बेनजीर कार की सनरूफ से बाहर आकर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रही थी कि तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। फिर हमलावर ने खुद को उड़ा भी लिया था।



Reference-www.jansatta.com

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