Russian serial killer Mikhail Popkov who got twice the life sentence – मिखाइल पोपकोव: कभी पुलिसकर्मी रहा एक सीरियल किलर जिसे दो बार मिली उम्रकैद की सजा

भारत में अपराध की दुनिया में कई सारे सीरियल किलर हुए। जिनके कारनामों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। एक ऐसा ही सीरियल किलर रूस में हुआ जो कभी पुलिस में रहा, लेकिन जुर्म इतने किए कि दो बार उम्रकैद की सजा मिली। इस किलर का नाम मिखाइल पोपकोव है। पोपोकोव पूरे रूस का ऐसा पहला हत्यारा है, जिसे दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

मिखाइल पोपकोव के बारे में रूसी मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि वह कभी रूस के पुलिस विभाग का हिस्सा था। उस पर करीब 200 महिलाओं-लड़कियों के कत्ल और दुष्कर्म का इल्जाम लगा था। जब उसे इन मामलो के चलते अदालत में पेश किया गया तो उसने कहा कि वह शहर की गंदगी साफ़ कर रहा था। पोपकोव के बारे में कहा जाता है कि वह खुद ही पहले महिलाओं की बेरहमी से हत्या करता था और फिर पुलिस के नाते जांच करने पहुंच जाता था।

मिखाइल पोपकोव ने अधिकतर हत्याओं को साल 1992 से 2010 के बीच अपने गृह नगर अंगार्स्क में ही अंजाम दी थी। इन सारी वारदातों को अंजाम देने के बाद जांच में शामिल होना किसी को अजीबोगरीब नहीं लगता था। पूछताछ में सामने आया था कि वह क्लब और बार के आसपास महिलाओं को इंतजार करता और लिफ्ट देने के बहाने उन्हें कार में बैठा लेता था। फिर सूनसान जगह पर ले जाकर रेप करता और चाकू-कुल्हाड़ी से हमला कर तड़पाता और फिर मार देता था।

हालांकि इन हत्याओं के बाद भी वह पुलिस को कई सालों तक चकमा देता रहा था। पोपकोव पर 18 से 50 साल की महिलाओं के बलात्कार और हत्या के लिए दो बार मुकदमा दर्ज हो चुका था। मिखाइल पकड़ा ऐसे गया कि उसने एक वारदात को अंजाम देने के दौरान एक गलती कर दी। ऐसे में जब पुलिस जांच करने पहुंची तो उसे घटनास्थल पर कार के टायरों के निशान मिले। जब जांच की गई तो पता चला कि ये गाड़ी के टायर के निशान मिखाइल के कार के थे।

शक के आधार पर जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और मिखाइल का डीएनए टेस्ट कराया गया तो राज खुल गया। पूछताछ में पता चला कि इस हत्याओं के पीछे उसी का हाथ है और करीब 200 महिलाओं-लड़कियों की हत्या कर चुका है। कोर्ट ने उसे वेयवोल्फ यानी मानव रूपी भेड़िया करार देते हुए 22 महिलाओं की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई। ये सजा उन अपराधों के लिए थी, जो उसने साल 1992 से 2010 के बीच अंजाम दिए थे।



Reference-www.jansatta.com

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