World Most Powerful Drug Trafficker Mexican Drug Lord El Chapo Story – मैक्सिकन ड्रग लॉर्ड अल चापो की कहानी जिसे कहा गया सुरंगों का बेताज बादशाह

दुनिया में कई सारे ड्रग्स माफिया हुए जिनमें पाब्लो एस्कोबार, मिगेल अनेल फ़िलिक्स गयार्दो जैसे कई नाम थे। इन्हीं में से एक नाम अल चापो का भी था, जिसे लोगों ने बाद में मैक्सिकन ड्रग लॉर्ड के नाम से जाना। अल चापो का जन्म 1957 में मैक्सिको के सिनालोआ के ला टूना गांव में हुआ। उसका असली नाम अक़ीन गुज़मैन लोएरा था। 15 साल का हुआ तो पहली बार भांग की खेती की और जब पैसे आये तो ठान लिया कि यही करना है। कुछ सालों बाद अक़ीन गुज़मैन ने घर छोड़ दिया और घर से करीब 750 किलोमीटर दूर गुआदलहारा चला गया।

सिनालोआ के ला टूना गांव से निकला अक़ीन गुज़मैन गुआदलहारा पहुंचा तो उसने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का काम किया। अक़ीन गुज़मैन को गुआदलहारा में आकर ही अल चापो नाम मिला और इसी नाम से वह कुख्यात हो गया। 1980 के दौर में वह ड्रग्स के धंधे में आया और फिर कुछ दिनों बाद उसकी मुलाकात अपने बॉस मिगेल अनेल फ़िलिक्स गयार्दो उर्फ अल बेदरीनो से हुई। गयार्दो के बारे में कहा जाता है कि मेक्सिको के इतिहास में उससे बड़ा ड्रग्स तस्कर कोई नहीं हुआ।

साल 1985 में अल बेदरीनो का नाम एक अधिकारी की हत्या में आया और उसे 1989 में अरेस्ट कर लिया गया। गुआदलहारा ड्रग कार्टेल बिखर गया फिर अल चापो ने सिनालोआ कार्टेल बनाया। अल चापो ने ड्रग्स की तस्करी में नया तरीका ईजाद किया जिसमें सुरंगों का इस्तेमाल किया गया। 1992-93 के दौर में अल चापो ने पूरे सिनालोआ में खूब सारी इमारतें और सुरंगे बनवाई लेकिन 1993 में चर्च के एक कार्डिनल की मौत हो गई।

इस मामले में अल चापो को हत्या, ड्रग्स सहित कई आरोपों में ग्वाटेमाला से गिरफ्तार कर 20 साल की सजा सुनाकर प्यूएंते ग्रांद जेल में भेज दिया गया। कई साल जेल में रहने के बाद साल 2001 में अल चापो जेल से फरार हो गया। फिर वह 13 साल पुलिस की पकड़ में नहीं आया और इस दौरान उसने दुनिया के हर कोने में सिनालोआ कार्टेल के जरिए तस्करी की। साल 2009 में अल चापो का नाम फ़ोर्ब्स के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल हुआ, जो कि 2013 तक बरकरार रहा।

फिर 2014 में अल चापो को गिरफ्तार कर आल्टपीनो की जेल में रखा गया। लेकिन डेढ़ साल ही बीते थे कि जुलाई 2015 में अल चापो जेल में सुरंग बनाकर मोटर साइकिल के जरिए फिर फरार हो गया। इस प्लान में अल चापो की मदद उसकी बीवी एमा कोरोनेल आइसपूरो ने की थी। पहले एमा ने जेल के बगल में जमीन खरीदी फिर बिल्डिंग बनवाई और उसी के रास्ते अल चापो की बैरक तक एक सुरंग बनाई। एमा ने इस काम के लिए कुछ जेल अधिकारियों को घूस भी दी थी।

हालांकि, 8 जनवरी 2016 के दिन अल चापो को एक शूट-आउट के बाद लॉस मोचिस, सिनालोआ में पकड़ लिया गया था। फिर 2017 में उसे अमेरिका में प्रत्यर्पित कर दिया गया, जहां न्यूयॉर्क की अदालत में उसके ऊपर मुकदमा शुरू हुआ। साल 2019 में अदालत ने अल चापो को आजीवन कारावास के अलावा तीस साल की सज़ा सुनाई गई है।



Reference-www.jansatta.com

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