सतह से हवा में अटैक करने वाले S-400 मिसाइल सिस्टम की दूसरी खेप आने में होगी देरी, रूस और यूक्रेन की जंग है वजह

सतह से हवा में अटैक करने वाले S-400 मिसाइल प्रणाली की दूसरी खेप के भारत में आने में देरी हो सकती है। बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते दूसरे स्क्वाड्रन की डिलीवरी में थोड़ी देरी मुमकिन है। मिसाइल प्रणाली की दूसरी स्क्वाड्रन एक ट्रेनिंग स्क्वाड्रन है। इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की कुल पांच खेप 2023 तक भारत आनी है।

बता दें कि ट्रेनिंग स्क्वाड्रन में सिमुलेटर और अन्य प्रशिक्षण उपकरण शामिल हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र के हवाले से बताया है कि “दूसरे ‘ऑपरेशनल’ स्क्वाड्रन की डिलीवरी जून में शुरू होनी थी लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अब इसमें कम से कम एक महीने की देरी हो सकती है।” भारतीय वायु सेना को हवाई और समुद्री मार्गों के माध्यम से दिसंबर में हजारों कंटेनरों में S-400 स्क्वाड्रन की पहली डिलीवरी मिली थी।

कुल मिलाकर, 2018 में रूस के साथ 40,000 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था। जिसके तहत भारतीय वायु सेना को छह महीने के अंतराल पर पांच S-400 स्क्वाड्रन मिलेंगे। साल 2021 में भारत को इसकी पहली खेप मिली थी। जिसे पंजाब सेक्टर में तैनात किया गया था। यह इस क्षेत्र से पाकिस्तान और चीन की तरफ से आने वाले किसी हमले को रोक सकता है।

इसकी हाई ऑटोमेटेड सिस्टम 380 किमी की दूरी पर दुश्मनों के जेट, जासूसी विमानों, मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाकर, ट्रैक कर और नष्ट कर सकते हैं। प्रत्येक S-400 स्क्वाड्रन में 128 मिसाइलों के साथ दो मिसाइल बैटरियां होती हैं। जिनमें 120, 200, 250 और 380 किलोमीटर की रेंज होती है।

बता दें कि S-400 को दुनिया का सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है। इसकी मारक क्षमता की रेंज 400 किमी है और ट्रैकिंग क्षमता 600 किमी है। मिसाइल सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी यह ढेर कर सकता है। जोकि इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह एक साथ 100 से अधिक उड़ने वाले टारगेट को ट्रैक कर सकता है।



Reference-www.jansatta.com

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