PLO cofounder Abu Jihad Khalil al Wazir killed in Tunisia by Mossad – जब इजराइल ने ट्यूनीशिया में एक मिशन को अंजाम देकर दुनिया में मचा दी थी खलबली, पढ़िए पूरा किस्सा

दुनियाभर में इजराइल और फिलिस्तीन की दुश्मनी जगजाहिर रही है। इसी दुश्मनी के बीच एक शख्स उभरकर सामने आया था, जिसे इजराइल अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता था। इस शख्स का नाम था यासिर अराफात। यासिर अराफात ने साल 1964 में कई सारे गुटों को मिलाकर एक संगठन बनाया, जिसे फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) का नाम दिया गया था। फिर अराफात 1968 में इसी संगठन के मुखिया भी बने थे।

फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात के साथ एक और करीबी था, जिसका नाम अबू जिहाद था। अबू जिहाद का असली नाम खलील अल-वजीर था और उसने यासिर अराफात के साथ फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) की स्थापना की थी। हालांकि, इजराइली सरकार ने उसे अपने देश पर हुए घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया था। अबू जिहाद मोसाद की हिटलिस्ट में था और उसे एक तटीय सड़क नरसंहार का मास्टरमाइंड माना जाता था।

दरअसल, साल 1978 में तेल अवीव के पास एक इजरायली बस पर हमला हुआ था, जिसमें 38 इजरायली मारे गए थे और 70 अन्य घायल हो गए थे। फिर और 1970 और 1980 के दशक में इजरायल में अलग-अलग जगह पर कई अन्य आतंकी हमले हुए थे। कई सालों तक इजराइल ने जानकारी जुटाने के बाद पता किया कि अबू जिहाद ट्यूनीशिया में रह रहा है। जिसके बाद मोसाद ने 15 अप्रैल, 1988 को ऑपरेशन से एक दिन पहले अपने एजेंट ट्यूनीशियाई तटों पर भेज दिए।

खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद को यासिर अराफात का दाहिना हाथ कहा जाता था। मोसाद ने अबू जिहाद को ठिकाने लगाने के लिए 30 एजेंट काम में लगाए। यह एजेंट्स टूरिस्ट बनकर ट्यूनीशिया पहुंचे थे। जबकि कुछ एजेंट्स ने वहां की सेना की वर्दी पहन रखी थी। तय प्लान के मुताबिक ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सारे एजेंट अबू जिहाद के घर की तरफ पहुंचे। इन एजेंट्स ने चॉकलेट के डिब्बे में बंदूक और उसका साइलेंसर छिपा रखा था।

इस मिशन को अंजाम देने के लिए जैसे ही मोसाद के एजेंट्स को इशारा मिला कि अब सही समय है, वह अबू जिहाद के घर में जा घुसे। हिट स्क्वॉड ने पहले पूरे कम्युनिकेशन सिस्टम को ब्लॉक किया। फिर गार्ड्स, नौकरों के साथ-साथ माली को भी गोली मार दी गई। हिट स्क्वॉड ने खलील अल-वजीर उर्फ अबू जिहाद को चंद सेकेंडों में उसके परिवार के सामने मार डाला। मोसाद अपना बदला पूरा कर चुकी थी और इस खबर ने बाद में पूरी दुनिया में हल्ला मचा दिया था। हालांकि, कई सालों की चुप्पी के बाद बड़े ही हल्के अंदाज में इजराइल ने इस घटना की जिम्मेदारी ली थी।



Reference-www.jansatta.com

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