Narendra Modi did not take questions criticism from the media on Europe tour Digvijay said- Not a single PC in 8 years after becoming PM – नरेंद्र मोदी ने यूरोप दौरे पर मीडिया से न लिए सवाल, आलोचना; दिग्विजय ने कहा- PM बनने के बाद 8 साल में न की एक भी पीसी

अपने मौजूदा विदेशी दौरे पर मीडिया के सवालों का सामना नहीं करने पर कई लोगों ने पीएम मोदी की आलोचना की है। करीब सात वर्षों से ऐसा होता रहा है कि प्रधान मंत्री केवल अपने समकक्ष के साथ मीडिया बयान जारी करते हैं, संवाददाताओं के सवाल-जवाब नहीं होते थे। हालांकि इसके पहले यह परंपरा रही है कि दोनों देशों के दो-दो पत्रकार अपने-अपने प्रश्न पूछा करते थे। जर्मन मीडिया डॉयचे वेले के मुख्य अंतरराष्ट्रीय संपादक रिचर्ड वॉकर ने पीएम मोदी की जर्मनी यात्रा के दौरान सोमवार को एक ट्वीट में इस मुद्दे को उठाया।

जर्मन यात्रा के दौरान चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा के बाद पीएम मोदी प्रेस के सामने आए तो केवल मीडिया बयान जारी किए। ऐसा कहा गया कि भारतीय पक्ष के आग्रह पर सवाल-जवाब का दौर नहीं रखा गया है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके आरोप लगाया है कि “राहुल जी के ट्वीट पर प्रधानमंत्री प्रतिक्रिया देते हैं और वह लोकतांत्रिक होने का दावा करते हैं। जबकि पिछले 8 सालों में पीएम बनने के बाद से उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है।”

दिग्विजय सिंह के ट्वीट पर उपेंद्र सिंह बघेल@USBUMR नाम के यूजर ने कमेंट किया, “गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने जा रहा कि इस धरती के 130 करोड़ आबादी वाले उस प्रधानमंत्री का नाम बताओ जो आजतक प्रेस कॉन्फ्रेंस न किया हो? जबाब होगा नरेंद मोदी।”

रिचर्ड वॉकर ने एक पोस्टस्क्रिप्ट लिखा, “वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स पर रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स (RSF) ने 180 देशों में भारत को 150वें स्थान पर रखा।” इस सूची में पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, ईरान, इराक और उत्तरी कोरिया भारत से भी नीचे हैं। वॉकर का कहना है कि सभी बड़े लोकतांत्रिक देश भारत से बेहतर हालात में रहे हैं, हालांकि रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स (RSF) ने इसके लिए मोदी सरकार को अकेले दोष नहीं दिया है।

ऐसा माना जाता है कि भारत के कुछ समाचार पत्र कई भाषाओं के समाचार पत्रों के पाठकों को नियंत्रित करते हैं। पीएम मोदी पर आरोप लगाया जाता है कि अपने देश में उन्होंने अभी तक एक भी प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित नहीं किया। यह भी आरोप है कि विदेशों में उन्हें डर रहता है कि विदेशी मीडिया उनसे मानवाधिकारों पर सवाल पूछेगा।



Reference-www.jansatta.com

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